जान जोखिम में: एक सुई के भरोसे घर पर चीरफाड़ कर रहा सरकारी डॉक्टर - नियमों को ताक में रखते हुए घर पर खोला ऑपरेशन थियेटर, केवल सुन्न करने वाली सुई लगाकर ऑपरेशन कर रहा डॉक्टर।

निजी अस्पताल में ज्यादा खर्च का डर दिखाकर घर बुला रहे, - एनेस्थीसिया तो दूर कक्ष को रोगाणुरहित तक नहीं किया जाता। एक सुई के भरोसे घर पर चीरफाड़ कर रहा सरकारी डॉक्टर - नियमों को ताक में रखते हुए घर पर खोला ऑपरेशन थियेटर, केवल सुन्न करने वाली सुई लगाकर ऑपरेशन कर रहा डॉक्टर।

एक सुई के भरोसे घर पर चीरफाड़ कर रहा सरकारी डॉक्टर - नियमों को ताक में रखते हुए घर पर खोला ऑपरेशन थियेटर, केवल सुन्न करने वाली सुई लगाकर ऑपरेशन कर रहा डॉक्टर।
एक सुई के भरोसे घर पर चीरफाड़ कर रहा सरकारी डॉक्टर - नियमों को ताक में रखते हुए घर पर खोला ऑपरेशन थियेटर

सिरोही. सरकारी मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध जिला अस्पताल के डॉक्टर ने अपने घर पर ऑपरेशन थियेटर खोल रखा है। निजी अस्पताल में ज्यादा खर्च का डर दिखाते हुए मरीजों को घर बुलाया जाता है, जहां बगैर संसाधन ऑपरेशन किए जा रहे हैं। वहीं, बगैर अनुमति चल रहे इस थियेटर में नियमों को ताक पर रखा हुआ है।

ऑपरेशन के लिए आवश्यक एनेस्थीसिया चिकित्सक तो दूर कक्ष को रोगाणुरहित तक नहीं किया जाता। घर पर ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर खुद मानते हैं कि उनके पास संसाधन नहीं है। यहां तक कि एनेस्थीसिया या टेक्निशियन भी नहीं है।

मरीज का दर्द कम करने के लिए डॉक्टर खुद ही केवल एक इंजेक्शन लगाते हैं। इससे ऑपरेशन वाला हिस्सा सुन्न हो जाता है। इसके बाद ऑपरेशन करते हैं। इसे कुछ इस तरह भी समझ सकते है कि यह डॉक्टर शरीर के हिस्से को सुन्न करने वाली एक सुई के भरोसे चीरफाड़ कर रहा है। 

दर्दनाक और जान की जोखिम वाले ऑपरेशन -
इस तरह से किए जा रहे ऑपरेशन कितने दर्दनाक होते होंगे यह सोच कर ही सिहरन उठती है। घर पर ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर खुद मानते हैं कि मरीज को दर्द तो होता है, लेकिन वे कम खर्च में ऑपरेशन करते हैं।

घर पर चला रहे थियेटर में उनके पास टेबल व कुछ उपकरण ही है यह भी वे मानते हैं। वैसे इस तरह के कक्ष में संक्रमण का पूरा अंदेशा बना रहता है, लेकिन मरीजों की जान जोखिम में डालने से गुरेज नहीं कर रहे। 

संक्रमण के बीच कर रहे ऑपरेशन - 
बगैर नियमों के चल रहे इस थियेटर में गंदगी पसरी रहती है। जहां-तहां खून सनी पट्टियां, रूई व खून बिखरा रहता है। बगैर संसाधन संचालित हो रहे इस तरह के ऑपरेशन थियेटर न केवल मरीजों को संक्रमित कर सकते हैं बल्कि मरीजों की जान पर भी बन सकती है।

संक्रमण के बीच ही मरीज का ऑपरेशन कर प्लेट या रॉड लगाई जाती है, लेकिन अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।  

आखिर क्यों अनजान बने हुए हैं सीएम सलाहकार -
सिरोही जिला अस्पताल में सुविधाओं का दावा करने वाले सीएम के सलाहकार एवं सिरोही विधायक संयम लोढ़ा भी इस ओर से मानों अनजान बने हुए हैं। जिला अस्पताल में यदि मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं तो सरकारी सुविधा बढ़ानी चाहिए, लेकिन इस पर इनका ध्यान नहीं जा रहा।

आखिर क्या कारण है कि सरकारी अस्पतालों में समुचित सुविधाएं का दावा करने वाले विधायक को इस तरह के मामले नजर नहीं आ रहे। कुछ  ऐसे ही कारण है कि इनके गृह क्षेत्र में काले कम्बल वाले बाबा अंधविश्वास के नाम पर असाध्य बीमारियों के इलाज का दावा कर चुके हैं। उस बाबा के शिविर का उद्घाटन भी विधायक ने ही किया था। 

तामझाम पूरा है और नियम ताक पर -
घर पर थियेटर चलाने के लिए डॉक्टर ने पूरा एक कक्ष बना रखा है। इसमें दो-तीन तरह की मशीनें भी लगाई हुई है। हालांकि तामझाम पूरा कर रखा है, लेकिन नियमों को ताक पर रखते हुए।

ऑपरेशन के दौरान टेबल पर मरीज को सुलाकर जायलोकेन नामक दवा का इंजेक्शन लगाया जाता है, ताकि ऑपरेशन वाला हिस्सा सुन्न हो जाए। इसके बाद भी यदि दर्द होता है तो मरीज झेलता है। इस तरह के दर्दनाक ऑपरेशन शायद उस जमाने में नहीं होते होंगे, जब एनेस्थीसिया की सुविधा नहीं होती थी। 

मोटे खर्च का डर दिखाकर घर बुला रहे -
बताया जा रहा है कि सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन के लिए साप्ताहिक दिवस निर्धारित कर रखे हैं। भर्ती होने वाले मरीजों को कम से कम पांच-सात दिन बाद ऑपरेशन किए जाने की बात कहते हैं।

जिन मरीजों को तत्काल या एक-दो दिन में ही ऑपरेशन करवाना हो उनको निजी अस्पताल में होने वाला बड़ा खर्च बताया जाता है। कम खर्च में ऑपरेशन के लिए खुद के घर बुलाते हैं। ऐसे में समय व पैसों की बचत के चक्कर में मरीज इनके घर तक पहुंच ही जाता है।

 

क्या कहते हैं नियम -
1. नियमानुसार सरकारी अस्पताल के डॉक्टर अपने घर पर ऑपरेशन थियेटर नहीं चला सकते। अन्य निजी क्लीनिकों में भी ऑपरेशन नहीं कर सकते। 

2. नियमों के तहत संचालित हो रहे ऑपरेशन थियेटर में समुचित व्यवस्थाएं होना आवश्यक है। थियेटर पूरी तरह से रोगाणुरहित एवं स्वच्छ कक्ष में होना चाहिए। 

3. ऑपरेशन के लिए आवश्यक विशेषज्ञों में चिकित्सकीय टीम एवं टेक्नीशियन शामिल रहते हैं। इसमें ऑपरेट करने वाले डॉक्टर के साथ एनेस्थीसिया व हेल्पर भी होने चाहिए।

डॉक्टर खुद मानते है मरीज को दर्द तो होता ही है -
घर पर ऑपरेशन चलाने के लिए उनके पास पूरी तरह से सैटल्ड थियेटर नहीं है, लेकिन मरीज आने पर ऑपरेशन करते हैं। सिम्पल सी टेबल है, जिस पर लेटाकर ऑपरेशन करते हैं। एक सुई लगाकर आसपास का हिस्सा सुन्न कर रॉड या प्लेट लगाते हैं। इसमें मरीज को दर्द तो होता ही है। 
- डॉ.नरेंद्रसिंह सोलंकी, अस्थिरोग विशेषज्ञ, सिरोही अस्पताल

घर पर ऑपरेशन थियेटर नहीं चला सकते ...
इस सम्बंध में जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र महात्मा का कहना है कि घर पर ऑपरेशन थियेटर नहीं चला सकते हैं। इसके लिए अगर किसी भी व्यक्ति की कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच कराएंगे तथा उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट की जाएगी। अस्पताल में काम करते हुए घर पर ऑपरेशन थियेटर चलाना वाजिब नहीं है।

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