सफेद संगमरमर पर उकेरा गया ताजमहल हर किसी को हैरान कर देता है। आइए जानते हैं ताजमहल के बारे में कुछ रोचक तथ्य जो आपने शायद ही पहले कभी सुनेेे होंगे।
ताजमहल का निर्माण मुमताज की याद में किया गया है। मुमताज पर्सिया देश की राजकुमारी थी। मुमताज की मौत 1631 में 14वीं संतान गौहर बेगम को जन्म देते समय बुरहानपुर (मध्य प्रदेश) में समय हुई थी।
शाहजहां ने 1631 में ताजमहल के निर्माण की घोषणा की, लेकिन निर्माण 1632 में शुरू हुआ। ताजमहल के निर्माण की व्यापक तैयारी की गई।
ताजमहल के निर्माण पर तब 3.20 करोड़ रुपये की लागत आई। आज से तुलना करें तो यह लागत करीब 53 अरब रुपये बैठती है।
उस्ताद अमहद लाहौरी की देखरेख में ताजमहल का निर्माण 20 हजार मजदूरों ने किया। ताजमहल 20 साल में बनकर पूरा हो पाया। बिना रुके लगातार काम चला।
ताजमहल के प्रवेश द्वार पर लिखा है- हे आत्मा, तू ईश्वर पास विश्राम कर। ईश्वर के पास शांति के साथ रह तथा उसकी पूर्ण शांति तुझ पर बरसे। ताजमहल के द्वार पर कुरान की आयतें उकेरी गई हैं।
ताजमहल की नींव कुआं आधारित है। विशेषज्ञों का कहना है कि ताजमहल को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है कि यमुना दीवार से सटकर बहती रहे। इस बारे में आईआईटी रुड़की ने शोध भी किया है।
मुगलकाल के सभी स्मारक लाल पत्थर से बने हैं, लेकिन ताजमहल ही सफेद संगमरमर से बनाया गया है। ताजमहल बनाने में रंगीन पत्थर पूरी दुनिया से मंगाए गए।
मुमताज और शाहजहां की असली कब्रें साल में सिर्फ तीन दिन शाहजहां के उर्स के मौके पर आम पर्यटकों के लिए खोली जाती हैं। पहले ये कब्रें आम पर्यटकों के लिए भी खोली जाती थीं।