BY FIRST BHARAT

51 शक्तिपीठों में खास हैं माता के ये 5 मंदिर

चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ हो गया है। इस साल चैत्र नवरात्रि 2 अप्रैल से लेकर 11 अप्रैल तक चलने वाली है। नवरात्रि के 9 दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं।

नवरात्रि के दौरान श्रद्धा और विश्वास के साथ माता की आराधना करने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठ माने गए है।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर पश्चिम बंगाल के कोलकाता के हुगली नदी के किनारे स्थित है। इस मंदिर में मां काली की मूर्ति स्थापित है। नवरात्रि के दौरान यहां माता के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है।

  दक्षिणेश्वर काली मंदिर कोलकाता

माता ज्वाला देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में है। इस मंदिर में हमेशा आग की लपटें निकलती रहती हैं। इसलिए इसे ज्वाला माता मंदिर कहा जाता है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है।

    माता ज्वाला देवी मंदिर कांगड़ा

कामाख्या मंदिर गुवाहाटी शहर की नीलांचल पहाड़ियों पर अवस्थित है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर में मां कामाख्या की मूर्ति स्थापित है। यह सिद्ध शक्तिपीठ है।

        कामाख्या मंदिर गुवाहाटी

करणी माता का मंदिर राजस्थान के देशनोक नामक स्थान पर स्थित है। माता के इस मंदिर को चूहों का मंदिर भी कहा जाता है। दरअसल इस मंदिर में हजारों चूहे एकत्रित होते हैंं। करणी माता को मां दुर्गा का रूप माना जाता है।    

     करणी माता मंदिर राजस्थान

नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में स्थित हैं यह 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर में मां नैना देवी की मूर्ति स्थापित है। मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती की आंख गिरी थी।

       नैना देवी मंदिर बिलासपुर

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