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By First Bharat
अभी हाल ही में भारतीय मूल के ब्रिटिश-अमेरिकी लेखक सलमान रुश्दी पर पश्चिमी न्यूयॉर्क में जानलेवा हमला हुआ है। जानिए सलमान रुश्दी की विवादित किताबी सफर के बारे में।
सलमान रुश्दी का जन्म 19 जून 1947 को मुंबई में हुआ। उनके पिताजी का नाम अनीस अहमद रुश्दी था। उनके पिताजी कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शिक्षित वकील थे जो बाद में व्यवसायी बने।
सलमान रुश्दी जन्म के कुछ समय बाद ही ब्रिटेन चले गए थे। उन्होंने प्राइमरी स्कूल की पढाई इंग्लैंड के रगबी स्कूल से की। उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में इतिहास की पढ़ाई की।
सलमान रुश्दी की चार शादियां हो चुकी हैं। लेखक बनने से पहले उन्होंने दो विज्ञापन एजेंसियों ओगिल्वी एंड माथेर और आयर बार्कर के लिए काम किया।
सलमान रुश्दी का पहला उपन्यास ग्रिमस 1975 एक आंशिक विज्ञान कथा है। जिसे आम तौर पर सार्वजनिक और साहित्यिक आलोचकों द्वारा नजरअंदाज कर दिया गया था।
द सैटेनिक वर्सेस, और मिडनाइट्स चिल्ड्रेन जैसी किताबें लिख कर चर्चा में आए रुश्दी को बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
सलमान रुश्दी को सैटेनिक वर्सेस के लिए ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला रुहोल्ला खोमैनी के फतवे का सामना करना पड़ा था। दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय को हिंसात्मक प्रतिक्रियाओं के लिए उकसाया था।
सलमान रुश्दी ने कई किताबें लिखीं जिसमें द जैगुअर स्माइल, द मूर्स लास्ट साई, द ग्राउंड बिनीथ हर फीट और शालीमार द क्लाउन शामिल हैं।
सलमान रुश्दी का चौथा नॉवेल 'द सैटेनिक वर्सेस' है। यह नॉवेल भारत और भारत के साथ साथ दुनिया के कई देशों में बैन है। इस किताब में मुस्लिम परंपरा के बारे में रुश्दी ने खुल कर लिखा।
सलमान रुश्दी ने जेम्स टैट ब्लैक मेमोरियल अवार्ड, आर्ट्स काउंसिल राइटर्स अवार्ड, प्रिक्स डु मेइल्यूर लिवर एट्रेंजर, व्हाइटब्रेड नॉवेल अवार्ड जैसे कई अन्य पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं।