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FIrst Bharat
May 27, 2022
कैक्टस के प्लांट्स को लेकर कई बातें है। लोग इन्हें मेन डोर के बाहर घर को बुरी नजर से बचाने के लिए लगाते है।
कैक्टस को हिंदी में रसाल कहते है। कुछ कैक्टस के अंग्रेजी और हिंदी नाम बडें ही मजेदार हैं, ओल्ड मैन को बडा बूढा, सास की पेढी और बेबीज टो को मुन्नी की एडी कहा जाता है।
कैक्टस की खास बात है कि पत्तियों के सिरे से नए पौधे निकल आते है। नए पौधों के लिए इनके पत्तियों को जडों से तोड कर सूखने के लिए छांव या रेत पर रख दे।
कैक्टस बिना देखभाल के भी अच्छी तरह से ग्रो कर सकता है। यह सूरज की तेजी रोशनी में ग्रो करता है और इसके पानी की भी बहुत कम आवश्यकता होती है।
कैक्टस को मौसम के हिसाब से बदलने की जरूरत नहीं हो पडती। ये मौसम के अनुसार ढल जाते है। इनकी बढने की रफ़्तार कम होती है।
कैक्टस को ट्रिम करने की जरूरत नही पडती। इन्हें रंग—बिरंगे छोटे गमलों में किचन की खिडकी या हॉल में टैबल पर भी रख सकते है।
इस पौधे को घर पर लागने के लिए सूखे गोबर या पत्तियों की खाद लें, इसमें चारकोल के टुकडे बराबर मात्रा में मिलाकर गमले में भरें और कैक्टस लगाएं।
ध्यान रखें कि हफ्ते भर में एक बार इसे जरूर पानी दें। इसके साथ ही कुछ समय के बाद इसकी कटाई भी करते रहे जिससे यह बहुत ज्यादा बड़ा न हो जाए।