डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है जो कि पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड है तथा जिसे गूगल सर्च इंजन्स द्वारा एक्सेस नहीं किया जा सकता है।
डार्क वेब पर अवैध चीजें बेची जाती हैं। ड्रग्स, मेलवेयर, फर्मवेयर, चोरी के क्रेडिट कार्ड और बैंकिंग की जानकारी आदि। साइबर अटैक सेवाओं को भी उन्हीं बाजारों में बेचा या खरीदा जाता है।
डार्क वेबसाइट्स का रजिस्ट्रेशन डॉट कॉम, डॉट इन जैसे डोमेन से न होकर .onion से होता है। ये वेबसाइट्स आम ब्राउजर्स में एक्सेस नहीं हो पाती है।
पहचान
आप अपनी कंपनी को सुरक्षा उपायों और सिक्योरिटी प्रोटोकॉल लगा कर उस नुकसान से बचा सकते हैं। अपने डिवाइस के लिए एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का उपयोग करें।
उपाय
अपने नेटवर्क उपकरणों को लॉग इन करें, सीएमईआर तैनात करें, फायरवॉल, राउटर कॉन्फिगर करें और सुरक्षित रूप से स्विच करें।
उपाय
अपनी सभी नेटवर्क गतिविधि से अवगत रहें, मजबूत पहचान और उपयोगकर्ता पहुंच प्रबंधन का उपयोग करें, भंडारण और पारगमन में अपने डेटा को एन्क्रिप्ट करें।
उपाय
घर में मौजूद मोबाइल फोन से लेकर लैपटॉप—कम्प्यूटर में देखें कि इस तरह का कोई ब्राउजर तो मौजूद नहीं। हो तो उसे अनइंस्टॉल करें।
उपाय
डार्क वेब का इस्तेमाल न करना ही इससे बचाव का सबसे अच्छा विकल्प है। फ्रॉड की जानकारी जुटाएं और उनसे सबक लें और परिजनों को भी बताएं।
उपाय
डार्क वेब के फायदे कम और नुकसान ज्यादा है। इनका इस्तेमाल न करें तो बेहतर है। किसी भी तरह के लालच से बचें, अन्यथा फ्रॉड का शिकार हो सकते है।