जन-जन की उम्मीद : इक्कीस ही साबित हो नया साल... स्वागत-नया साल लाए खुशियां हजार....

बीसवीं सदी के तीसरे दशक का आगाज हो चुका है।कोरोना आपदा में बीते पिछले साल का अनुभव को भुलाते हुए क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि वर्ष 2021 वाकई इक्कीस अर्थात पिछले सालों से अपेक्षाकृत श्रेष्ठ साबित हो।नए साल के आगमन पर नई उम्मीद की किरणों के साथ ही कई सौगातों का मिलने का भी इंतजार रहेगा।

इक्कीस ही साबित हो नया साल... स्वागत-नया साल लाए खुशियां हजार....

गौरव अग्रवाल,फर्स्ट भारत,सरुपगंज। बीसवीं सदी के तीसरे दशक का आगाज हो चुका है।कोरोना आपदा में बीते पिछले साल का अनुभव को भुलाते हुए क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि वर्ष 2021 वाकई इक्कीस अर्थात पिछले सालों से अपेक्षाकृत श्रेष्ठ साबित हो।नए साल के आगमन पर नई उम्मीद की किरणों के साथ ही कई सौगातों का मिलने का भी इंतजार रहेगा।

बीते वर्ष 2020 में भी क्षेत्रवासियों को काफी उम्मीदें थी लेकिन कोरोना आपदा ने सारी उम्मीदों को लील लिया था।लोगों को काफी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा वहीं शादी समारोहों पर भी ब्रेक लग गया था वहीं लोगों को अपने ही घरो में कैद तक कर दिया गया था।नए वर्ष में बदलाव की बयार के साथ ही उम्मीद भी अपार है।क्षेत्रवासियों के समक्ष जहां चुनौतियों भी काफी है तो वहीं विकास भी आस भी बहुत है।एक तरफ जहां सरकार से अपेक्षाएं अधिक है तो वहीं दूसरी तरफ लोगों से बदलाव का संकल्प अपेक्षित है।

अंधेरे को मिटाकर आई नए साल की नई भोर-

नए साल की नई भोर ने अपनी चहुओर आभा बिखेरी है।बीते साल के अंधेरे को प्रकाश ने उजाला से भर दिया है।उम्मीद है सूरज की पहली किरण के साथ ही क्षेत्रवासियों में नई उमंग और ऊर्जा का संचार हो।


मारकुंडेश्वर धाम को मिले पर्यटन का दर्जा-

पिंडवाड़ा के अजारी गांव स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मारकुंडेश्वर धाम पर अभी तक जनप्रतिनिधियों व सरकार की निगाहें नही है।हर बार सरपंच से लेकर विधायक,सांसद इसे पर्यटन के रूप में विकसित करने का वायदा करते है लेकिन पर्यटन रूप में विकसित करना तो दूर अभी तक सुदूर व्यवस्थाओ को भी ठीक नही करने से श्रद्धालुओं का परेशानी का सामना करना पड़ता है।गौरतलब है कि पूर्व उपराष्ट्रपति व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत ने मारकुंडेश्वर धाम को पर्यटक स्थल बनाने की घोषणा की थी लेकिन उसके बाद कई सरकारे आई और गई लेकिन उनकी इस घोषणा पर किसी भी ने सरकार ने अमल नही लिया लिहाजा देश-प्रदेश में प्रसिद्ध मारकुंडेश्वर धाम आज भी पर्यटन के रूप में विकसित होने की बांट जोह रहा है।मारकुंडेश्वर धाम पर देश-प्रदेश से लाखो श्रद्धालू धोक लगाते है।बारिश के दिनों में यहां का प्राकृतिक वातावरण लोगों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करता है।अब नए साल में लोग मारकुंडेश्वर धाम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने की आस लगाए बैठे है।

शिक्षा क्षेत्र को मिलेगी कोरोना से निजात-

कोरोना आपदा के बीच उम्मीद की जा रही है कि नूतन वर्ष में स्कूल कॉलेजों का संचालन शुरू होने का माहौल बनेगा।पिंडवाड़ा में स्वीकृत हुए नए महाविद्यालय का भवन बनने की भी पूरी आस है।साथ ही पूर्व में संचालित स्कूलों में नए विषय खुलने की भी उम्मीद जताई जा रही है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार-

सरुपगंज कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जरूरत है।दरअसल यहां पर अस्पताल भवन भी कम पड़ रहा है वहीं अस्पताल में जनाना वार्ड नही होने से मरीजो को समस्या का सामना करना पड़ रहा है।अस्पताल में रिक्त पदों को भरने की भी उम्मीद जताई जा रही है।ऐसे में अब स्वास्थ्य व्यवस्था का उपचार होने की आस नए वर्ष में है।

बस स्टैंड का सपना हो साकार-

ज़िले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत भाँवरी के सरुपगंज कस्बे के लिए बस स्टैंड भवन एक बड़ा सपना है।कस्बे में बस स्टैंड भवन नही होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।ऐसे में यात्रियों को राजमार्ग पर खुले में ही बारिश,धूप व सर्दी के बीच बस का इंतजार करना पड़ता है जिससे उन्हें भारी परेशानी होती है।ऐसे में अब देखने वाली बात सवेदनशील कांग्रेस सरकार आमजन की समस्याओं को किस तरह से लेती है और आने वाले साल में बस स्टैंड बन पाता है या नही।

अपराधों पर लगे अंकुश-

क्षेत्र में अपराधों का ग्राफ दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।पुलिस व प्रशासन के समक्ष इसे रोकना सबसे बड़ी चुनौती होगी।क्षेत्र में चोरी,हत्या व बलात्कार के साथ साथ अब साईबर अपराध भी दिनों-दिन बढ़ते जा रहे है।सरुपगंज,रोहिड़ा समेत पिंडवाड़ा थाने में नफरी बढ़ाने की भी जरूरत है।सरुपगंज थाने में अब सब इंस्पेक्टर की जगह सर्किल इंस्पेक्टर की जरूरत है।ऐसे में अब पुलिस मुख्यालय को सीधे ही सर्किल इंस्पेक्टर की पोस्ट करनी चाहिए।

यातायात व्यवस्था भी सुदृढ़ करने की आवश्यकता-

सरुपगंज कस्बे में यातायात जाम व अतिक्रमण से कस्बे की सुंदरता  खराब हो रही है।पाबन्दी होने के बावजूद भी कस्बे में भारी वाहन खड़े रहते है।पूर्व में कस्बे में यातायात पुलिसकर्मी लगे हुए थे लेकिन पुलिसकर्मियों को हटाने से यातायात व्यवस्था दिन-प्रतिदिन लचर होती जा रही है।ऐसे में उम्मीद यह भी जताई जा रही है कि एक बार फिर से कस्बे में यातायात पुलिसकर्मियों को लगाया जाए।

पानी की समस्या का हो समाधान-

क्षेत्र में पेयजल को लेकर त्राहि-त्राहि मची हुई है।सरुपगंज समेत आसपास के गांवो में चार-पांच दिनों में एक बार पानी मिल रहा है।करीब 20 साल पहले लगी पाईपलाइन पूर्ण रूप से जर्जर व क्षतिग्रस्त हो गई है।लिहाजा कई बार जगह जगह से पाईपलाइन लीकेज हो जाती है जिससे लोगों को पेयजल सुविधा से वंचित होना पड़ता है।ऐसे में अब जरूरत है कि नई पाईपलाईन बिछाई जाएं क्योंकि अब आबादी भी बढ़ गई है और लोगों को जरूरत भी।